गर्मी आपके बालों के स्वास्थ के लिए बहुत मुश्किल हो सकता हैं और ऐसा इसलिए होता है क्युकि तापमान अक्सर 40°C से ऊपर चला जाता है। DermaClinix में आने वाले कई मरीज़ इस मौसम में बहुत ज़्यादा बाल झड़ने की शिकायत करते हैं। हालाँकि विशेषज्ञ ये बताते है कि रोज़ाना 50-100 बाल झड़ना नॉर्मल है, लेकिन गर्मियों में ज़्यादा बाल झड़ना चिंता की बात हो सकती है।
गर्मी, पसीना, डिहाइड्रेशन और स्कैल्प इन्फेक्शन गर्मी के मौसम में बाल झड़ने के कुछ मुख्य कारण हैं। कारणों को समझने और बचाव के तरीके अपनाने से आपको खराब मौसम में भी स्वास्थ और मज़बूत बाल बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
गर्मियों में बाल क्यों झड़ते हैं?
गर्मियों में बाल झड़ना एक आम मौसमी समस्या है। स्कैल्प पर पर्यावरण से होने वाले नुकसान का असर ज़्यादा होता है, और बालों की ग्रोथ साइकिल पर कुछ समय के लिए असर पड़ सकता है। ज़्यादा पसीना आना, धूप में निकलना, और हेयर केयर रूटीन में बदलाव से बालों की जड़ें कमज़ोर हो जाती हैं।
गर्मियों में स्कैल्प पर तेल और पसीना भी बढ़ जाता है, जिससे गंदगी और बैक्टीरिया के इकट्ठा होनी की संभावना बढ़ जाती हैं। इससे हेयर फॉलिकल्स बंद हो सकते हैं और बाल झड़ सकते हैं। इसके अलावा, डिहाइड्रेशन और न्यूट्रिशन का असंतुलन, जो गर्मियों में ज़्यादा आम है, बालों की मज़बूती कम कर सकता है। मौसम में बाल झड़ना आमतौर पर कुछ समय के लिए होता है, लेकिन अगर इसे ठीक से मैनेज न किया जाए, तो यह गंभीर हो सकता है।
गर्मियों में बाल झड़ने के मुख्य कारण क्या है?
आपके बाल ढेर सारे कारणों से झड़ सकते है लेकिन नीचे हमने कुछ मुख्य कारणों को शुचिबद्ध किया है जिनमें शामिल है:-
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बहुत ज़्यादा पसीना आना और स्कैल्प में इन्फेक्शन
गर्मियों में बाल झड़ने का एक सबसे आम कारण पसीना आना है। पसीने में नमक और waste product होते हैं, जो स्कैल्प में जलन पैदा कर सकते हैं। जब पसीना धूल और प्रदूषण के साथ मिलता है, तो यह हेयर फॉलिकल्स को ब्लॉक कर देता है और बालों की जड़ों को कमज़ोर कर देता है। इस स्थिति से dandruff, फंगल इन्फेक्शन और खुजली भी हो सकती है। लगातार जलन से हेयर फॉलिकल्स को नुकसान पहुँचता है और बाल ज़्यादा झड़ते हैं। जो लोग अक्सर ट्रैवल करते हैं या बाहर काम करते हैं, उन्हें इसका खतरा ज़्यादा होता है। विशषज्ञ बताते है कि इस समस्या से बचने के लिए स्कैल्प की साफ़-सफ़ाई बनाए रखना ज़रूरी है।
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धूप में रहना और UV किरणों से होने वाले नुकशान
तेज़ धूप और UV किरणें स्कैल्प और बालों दोनों को नुकसान पहुँचा सकती हैं। UV रेडिएशन बालों के प्रोटीन स्ट्रक्चर, जिसे केराटिन कहते हैं, को कमज़ोर कर देती है। इससे बाल रूखे, कमज़ोर और टूटने लगते हैं। ज़्यादा देर तक धूप में रहने से भी हेयर फॉलिकल्स को नुकसान पहुँच सकता है और बालों की ग्रोथ धीमी हो सकती है। स्कैल्प रूखा, सूजा हुआ या सनबर्न हो सकता है, जिससे बाल और झड़ते हैं। भारत में, जहाँ धूप तेज़ होती है, बालों को UV किरणों से बचाना बहुत ज़रूरी है।
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डिहाइड्रेशन और न्यूट्रिशन की कमी
गर्मियों में, पसीने के ज़रिए शरीर से ज़्यादा पानी निकल जाता है। अगर आप पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं, तो डिहाइड्रेशन आपकी पूरी स्वास्थ पर असर डाल सकता है, जिसमें आपके बाल भी शामिल हैं।
बालों को बढ़ने के लिए प्रोटीन, आयरन, बायोटिन और विटामिन जैसे सही पोषक तत्त्व की ज़रूरत होती है। डिहाइड्रेशन से बालों की जड़ों तक पोषक तत्त्व की सप्लाई कम हो जाती है, जिससे वे कमज़ोर हो जाते हैं। बहुत से लोग गर्मियों में कम पर्यात पोषक तत्त्व का सेवन करते हैं, जिससे बाल और झड़ते हैं।
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बार-बार बाल धोना और केमिकल का संपर्क
गर्मियों में लोग पसीना और गंदगी हटाने के लिए अपने बाल ज़्यादा बार धोते हैं।स्कैल्प को साफ़ रखना ज़रूरी है, लेकिन ज़्यादा धोने से स्कैल्प से नैचुरल ऑयल निकल सकते हैं। इससे बाल रूखे, कमज़ोर और टूटने की संभावना ज़्यादा हो जाती है। हार्श शैम्पू, केमिकल ट्रीटमेंट या स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से भी बाल खराब हो सकते हैं। स्ट्रेटनर और ड्रायर जैसे हीट स्टाइलिंग टूल्स का ज़्यादा इस्तेमाल नुकसान को और बढ़ाता है।
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Dandruffऔर फंगल इन्फेक्शन
गर्मियों में गर्मी और नमी के कारण फंगल ग्रोथ के लिए एकदम सही माहौल बन जाता है। इससे Dandruff, खुजली और स्कैल्प में इन्फेक्शन हो सकता है।Dandruff बालों की जड़ों को कमज़ोर करता है और बालों के बढ़ने के साइकिल में रुकावट डालता है। लगातार खुजलाने से हेयर फॉलिकल्स को भी नुकसान हो सकता है। अगर इलाज न किया जाए, तो स्कैल्प इन्फेक्शन से बाल बहुत ज़्यादा झड़ सकते हैं।
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हार्मोनल बदलाव और स्ट्रेस
हॉर्मोन के स्तर में बदवाल और स्ट्रेस भी गर्मियों में बाल झड़ने की वजह बन सकते हैं। विशषज्ञ बताते है कि गर्मी में हार्मोनल बैलेंस बिगड़ सकती है जो बाल का झड़ना बढ़ा सकता है। साथ ही स्ट्रेस स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन पर असर डालता है और हेयर फॉलिकल्स को कमज़ोर करता है। आधुनिक लाइफस्टाइल, नींद की कमी और काम का प्रेशर इस हालत को और खराब कर देते हैं।
गर्मियों में बाल झड़ने से रोकने के उपाय
ऐसे बहुत सारे कारक है जो गर्मी में बालों के झरने को कम कर सकता है और इन कारकों में शामिल हैं:-
- अपने स्कैल्प को साफ़ रखें– गर्मियों में स्कैल्प की साफ़-सफ़ाई बनाए रखना ज़रूरी है। हफ़्ते में 2-3 बार माइल्ड शैम्पू से बाल धोएं। इससे पसीना, तेल और गंदगी हटाने में मदद मिलती है। लेकिन बाल ज़्यादा धोने से बचें, क्योंकि इससे स्कैल्प रूखा हो सकता है। साफ़ बाल बालों की ग्रोथ के लिए healthy माहौल बनाते हैं।
- बालों को धूप से बचाएं– बाहर जाते समय अपने सिर को स्कार्फ़, कैप या हैट से ढकें। यह बालों को नुकसानदायक UV किरणों से बचाता है। दोपहर में सीधी धूप से बचें और प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करें क्युकी यह रूखेपन और बालों को डैमेज होने से बचाता है।
- हाइड्रेटेड रहें– रोज़ कम से कम 2-3 लीटर पानी पिएं। सही हाइड्रेशन बालों की जड़ों को मज़बूत रखता है। अपनी डाइट में तरबूज, खीरा और संतरे जैसे ताज़े फल शामिल करें क्युकी यह हाइड्रेशन बनाये रखने में मदद करता है और हाइड्रेशन बालों की स्वास्थ को बेहतर बनाता है और बालों का झड़ना कम करता है।
- हेल्दी डाइट लें– बालों को बढ़ने के लिए सही न्यूट्रिशन की ज़रूरत होती है। दाल, अंडे, दूध और नट्स जैसे प्रोटीन से भरपूर खाना खाएं। अपने रोज़ के खाने में हरी सब्जियां और फल शामिल करें। आयरन, बायोटिन और विटामिन बालों की जड़ों को मजबूत करते हैं। एक संतुलित भारतीय आहार बालों को झड़ने से रोकने में अहम भूमिका निभाता है।
- ज़्यादा स्टाइलिंग से बचें– हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर और केमिकल ट्रीटमेंट का इस्तेमाल कम करें। साथ ही टाइट हेयरस्टाइल से बचें, क्योंकि वे बालों की जड़ों पर दबाव डालते हैं। आप नेचुरल और हल्के हेयर केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे बालों की मज़बूती बनी रहती है।
- अपने बालों में रेगुलर तेल लगाएं– हेयर ऑयल स्कैल्प को पोषण देता है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। तेल बालों को रूखेपन और टूटने से भी बचाता है। आप हफ़्ते में 2-3 बार अपने स्कैल्प पर हल्के हाथों से मसाज करें इससे हेयर फॉलिकल्स मज़बूत होते हैं।
- स्ट्रेस मैनेज करें– रेगुलर योग, मेडिटेशन और एक्सरसाइज़ करें। इस से आपको अच्छी नींद मिलेगी जो बालो को आराम देता है जिस से बालों की हेल्थ बेहतर होती है। स्ट्रेस कंट्रोल करने से बाल झड़ना रुकता है। बालों की ग्रोथ में मेंटल हेल्थ का अहम रोल होता है।
हेयर विशषज्ञ से कब सलाह लें
अगर 2-3 महीने से ज़्यादा बाल झड़ते रहें, तो किसी विशषज्ञ से सलाह लें। बहुत ज़्यादा बाल झड़ना अंदरूनी समस्याओं का संकेत हो सकता है जैसे:
- न्यूट्रिशन की कमी
- हार्मोनल इम्बैलेंस
- थायरॉइड डिसऑर्डर
- जेनेटिक हेयर लॉस
नोट- जल्दी इलाज से बालों का हमेशा के लिए झड़ना रुक जाता है। विशषज्ञ इलाज से रिकवरी बेहतर होती है।
निष्कर्ष
गर्मियों में बाल झड़ना भारत में गर्मी, पसीने, डिहाइड्रेशन और धूप की वजह से एक आम समस्या है। हालांकि, मौसम के हिसाब से बाल झड़ना आमतौर पर कुछ समय के लिए होता है, लेकिन बालों की खराब देखभाल और ध्यान न देने से यह हालत और खराब हो सकती है। स्कैल्प इन्फेक्शन, UV डैमेज, पोषक तत्वों की कमी और स्ट्रेस जैसे कारणों को समझने से बचाव के उपाय करने में मदद मिलती है।
स्कैल्प की साफ़-सफ़ाई बनाए रखना, बालों को धूप से बचाना, हेल्दी डाइट लेना, हाइड्रेटेड रहना और स्ट्रेस मैनेज करने जैसे आसान तरीकों से बालों का झड़ना काफी कम हो सकता है। अगर बाल बहुत ज़्यादा या लगातार झड़ते हैं, तो किसी विशषज्ञ से सलाह लेना ज़रूरी है। सही देखभाल, इलाज और हेल्दी लाइफस्टाइल की आदतों से, आप गर्मी के मौसम में भी मज़बूत, हेल्दी और सुंदर बाल बनाए रख सकते हैं।
अक्सर पूछे जानेवाले प्रश्न
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क्या गर्मियों में बाल झड़ना परमानेंट होता है?
गर्मियों में बाल झड़ना आमतौर पर टेम्पररी होता है जो मौसम बदलने और स्कैल्प की हेल्थ बेहतर होने पर फिर से उग आते हैं। हालांकि, बालों की देखभाल पर ध्यान न देने से बाल परमानेंट रूप से पतले हो सकते हैं। अतः शुरुआती रोकथाम ज़रूरी है। साथ ही अच्छी आदतें बालों को मज़बूत बनाती हैं।
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शुरुवाती देखभाल क्यों जरुरी है?
बालों के झड़ने को नज़रअंदाज़ करने से समस्या और बढ़ सकती है। विशषज्ञ बताते है कि जल्दी देखभाल से बचाव हमेशा बेहतर होता है और यह कॉम्प्लीकेशंस से भी बचाता है।
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गर्मियों में बाल झड़ने के बारे में गलतफहमियां क्या हैं?
बहुत से लोग मानते हैं कि गर्मियों में बाल हमेशा झड़ते हैं। यह सच नहीं है। सही देखभाल से मौसमी बाल झड़ने को कंट्रोल किया जा सकता है। कुछ लोग बाल झड़ने के डर से बाल धोने से बचते हैं, जिससे स्कैल्प में इन्फेक्शन और बढ़ जाता है। असली कारणों को समझने से सही इलाज में मदद मिलती है।